न्यू दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमले के दो हफ्ते हुए हैं। दो हफ्ते में अमेरिका और इजरायल मिलकर भी ईरान को हथियार डालने पर मजबूर नहीं कर पाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े-बड़े दावे जरूर कर रहे हैं, लेकिन खाड़ी में अपने सहयोगी देशों को भी ईरानी हमले से नहीं बचा पा रहे हैं।

न्यूज डेस्क समाचार18
उल्टे ईरान की होर्मुज स्ट्रेट स्ट्रैटजी ने अमेरिका पर वैश्विक दबाव बढ़ा रखा है।
इन हालातों में अमेरिका ने अपनी हालिया विदेशी में जो यू-टर्न लिया है, उसपर ईरान ने उसपर इस युद्ध के दौरान का सबसे बड़ा जुबानी हमला बोला है और यहां तक कह दिया है कि वॉशिंगटन को भारत और अन्य देशों से गुहार लगाने की नौबत आ गई है।
ईरान युद्ध के दौरान ढीले पड़े डोनाल्ड ट्रंप के तेवर
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर में जब से भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के दावे का खंडन किया, उन्होंने भारत के खिलाफ टैरिफ के नाम पर धमकाने वाला रवैया अपनाए रखा। यहां तक कि उन्होंने रूस से तेल खरीदने के नाम पर भारत पर ही सबसे ज्यादा टैरिफ लगा दिया। लेकिन, ईरान युद्ध के बीच अचानक ट्रंप के तेवर ढीले पड़ते दिखाई दिए हैं।

