
जब धरती ने पहली बार साँस ली थी, जब इंसान का नामो-निशान तक नहीं था, तब #अरावली पर्वत खड़ा हुआ कहा जाता है, आज से लगभग 200 करोड़ वर्ष पहले, धरती की कोख फटी, और अरावली जन्मा।यह कोई साधारण #पहाड़ नहीं था, यह धरती की ढाल था, राजस्थान का रक्षक था।समय बदला, राजे आए, साम्राज्य मिटे, रेगिस्तान फैलने को आतुर हुआ#रेगिस्तान फैलने को आतुर हुआ लेकिन अरावली चट्टान बनकर खड़ा रहा। इसने आँधियों को रोका, बाढ़ को थामा, ज़मीन के नीचे पानी को ज़िंदा रखा।आज वही अरावली खामोश होकर सवाल पूछ रहा है।अगर मेरी ऊँचाई 100 मीटर से कम है, तो क्या मेरी ज़रूरत भी कम हो गई?आज कहा जा रहा है, छोटे पहाड़ काटे जा सकते हैं। लेकिन कोई ये नहीं पूछता कि ये छोटे पहाड़ ही हमें बचाते हैं।ये पहाड़ न हों तो रेगिस्तान शहरों को निगल जाएगा, पानी सूख जाएगा, हवाएँ ज़हर बन जाएँगी।अरावली कहता है, मैं ऊँचा नहीं, लेकिन अमर हूँ। मैं बूढ़ा हूँ, पर कमजोर नहीं।जो पहाड़ करोड़ों सालों से खड़ा है, वो आज मशीनों से डर रहा है।अगर आज हमने अरावली को खो दिया तो आने वाली #पीढ़ियाँ पूछेंगी तुम्हें बचाने वाला था, फिर तुमने उसे क्यों नहीं बचाया?अगर आज हमने अरावली को खो दिया तो आने वाली पीढ़ियाँ पूछेंगी तुम्हें बचाने वाला था, फिर तुमने उसे क्यों नहीं बचाया ?
संपादक डेस्क समाचार 18
23 दिस 2025 .

